पराली प्रबंधन को आमदनी का साधन बनाएं किसान, दूसरों को भी करें जागरूक : डीसी प्रीति

एसडीएम व कृषि अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में रखें कड़ी निगरानी

सुनहरा आंचल
विजय सिरोही

जिला प्रशासन फसल अवशेष व पराली जलाने के मामले में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। हरसेक पर आगजनी की लोकेशन मिलने पर, जहां जिला प्रशासन की ओर से संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है, वहीं किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन करने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

पदभार संभालने के उपरांत नव नियुक्त डीसी प्रीति ने किसानों से आह्वान किया कि वे फसल अवशेष नहीं जलाएं, बल्कि इसका प्रबंधन करके प्रति एकड़ 1000 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में पाएं। उन्होंने संबंधित एसडीएम व कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे क्षेत्र में रहकर दिन के साथ-साथ रात को भी कड़ी निगरानी करें। इसके साथ-साथ ग्राम स्तर की टीमें किसानों को जागरूक अभियान में और तेजी लाएं। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लाभ तथा पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताएं। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से प्रकृति, जमीन तथा मानव जीवन पर अत्यंत गंभीर व प्रतिकूल प्रभाव पड़ते है, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट होने के साथ-साथ प्राकृतिक प्रदूषण की वजह से मनुष्य भी अनेक जानलेवा बीमारियों का शिकार होता है। किसान किसी भी सूरत में किसान पराली ना जलाएं बल्कि अवशेष प्रबंधन कर जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाए रखें।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. बाबू लाल ने उपायुक्त को अवगत करवाया कि अब तक हरसेक के माध्यम से 158 पराली जलाने के मामले सामने आए हैं, जिनमें से 57 फायर लोकेशन नहीं मिली, जबकि 63 में धान की फसल के अवशेष जलाए जाने की बात सही निकली है और उन पर 1 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा 29 मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है और 122 मामलों में मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की गई है। किसानों को जागरूक करने के लिए जागरूकता वाहन गांव-गांव जा रहे हैं। किसानों को सरकार द्वारा कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, ताकि वे फसल अवशेषों का सही से प्रबंधन कर सके।

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