अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ फैला रही जागरूकता

वंदना बागड़ी एक सोशल एक्टिविस्ट हैं, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वह ‘विक्रांत एजुकेशन एंड मार्शल आर्ट ट्रस्ट’ के माध्यम से न केवल लड़कियों को योग और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दे रही हैं, बल्कि अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी जागरूकता फैला रही हैं। उनके नेतृत्व में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना है। वंदना बागड़ी जैसी समाजसेवी महिलाओं की वजह से आज कई लड़कियों को नई राह मिल रही है। उनका प्रयास न केवल महिलाओं की स्थिति को सुधार रहा है, बल्कि एक नए युग की शुरुआत कर रहा है, जहां महिलाएं सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक हैं।
प्रस्तुत है उनसे हुई एक विस्तृत बातचीत।
प्रश्न: वंदना जी, आपने सामाजिक कार्यों में कदम कैसे रखा?
मेरे सफर की शुरुआत समाज में महिलाओं की स्थिति को देखकर हुई। मैंने देखा कि महिलाओं को कई स्तरों पर पीछे रखा जाता है चाहे वह शिक्षा हो, आत्मरक्षा हो, या फिर आर्थिक स्वतंत्रता। अक्सर अंधविश्वास और सामाजिक बंधन महिलाओं की उन्नति में बाधा डालते हैं। मैंने ठाना कि इस स्थिति को बदलना है। इसी सोच के साथ मैंने विक्रांत एजुकेशन एंड मार्शल आर्ट ट्रस्ट के जरिए काम करना शुरू किया।
प्रश्न: आपके एनजीओ के तहत किन-किन प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है?
हमारा एनजीओ मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर काम करता है – शिक्षा, आत्मरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण। गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा और ट्यूशन की सुविधा दी जाती है। खासतौर पर लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया जाता है। लड़कियों को करियर काउंसलिंग भी दी जाती है। लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जाती है।
योग और ध्यान सिखाया जाता है, ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनें। महिलाओं को छेड़खानी और हिंसा से निपटने के लिए आत्मरक्षा तकनीकें सिखाई जाती हैं।उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
प्रश्न : आगामी योजना क्या है ?
जल्द ही लड़कियों के लिए निःशुल्क सिलाई सैंटर शुरू किया जाएगा, जहां उन्हें सिलाई, कढ़ाई और अन्य व्यावसायिक कौशल सिखाए जाएंगे। महिलाओं को बचत योजनाओं और बीमा योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
प्रश्न: आपने अंधविश्वास को महिलाओं की तरक्की में सबसे बड़ी बाधा बताया, इस पर थोड़ा विस्तार से बताइए।
समाज में महिलाओं को हमेशा से कमजोर समझा गया है। पुरानी मान्यताओं, झूठी कहानियों और अंधविश्वासों ने महिलाओं को दबाकर रखा। अगर कोई लड़की पढ़ाई करना चाहती थी, तो कहा जाता था कि पढ़-लिखकर क्या करेगी, शादी तो करनी ही है। अगर कोई महिला आत्मनिर्भर बनना चाहती थी, तो उसे घर की चारदीवारी में कैद कर दिया जाता था। मुझे लगता है कि इन बेड़ियों को तोड़ना जरूरी है। हर बात को तर्क और विवेक से परखना चाहिए, बिना सोचे-समझे किसी भी चीज को मानना सही नहीं है।
प्रश्न: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आपकी क्या राय है?
आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक रूप से मजबूत होने का नाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक मजबूती से भी जुड़ी है। महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सीखने चाहिए, ताकि वे खुद की सुरक्षा कर सकें। उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और आत्मसम्मान के साथ जीना आना चाहिए। हम लड़कियों को शिक्षा, कौशल विकास और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
प्रश्न: आप समाज के बाकी लोगों से क्या अपील करना चाहेंगी?
मैं सभी माता-पिता से कहना चाहूंगी कि वे अपनी बेटियों को भी बेटों की तरह आगे बढ़ने का मौका दें। समाज में बदलाव लाने के लिए जरूरी है कि हम अपनी सोच बदलें। महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी का हक मिले, इसके लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
