कलायत में फिर बारिश ने खोली प्रशासन के बाढ़ प्रबंधन की पोलगलियों, सडक़ों और बाजारों में जमा हुआ पानी लोगों ने किया गंभीर समस्याओं का सामना

खुद उप मंडल मुख्यालय भवन की दीवार के पास भी भारी भराव

सुनहरा आँचल न्यूज/ हरियाणा/ कैथल/कलायत(तरसेम सिंह)


कलायत में बारिश लगातार प्रशासन के बाढ़ प्रबंधन और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रही है। बाढ़ प्रबंधन के तहत नगर पालिका, पंचायती राज, सिंचाई, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी व अन्य विभाग बड़ा बजट व्यय कर रहे हैं। इसके बावजूद भी जल भराव की मार झेलने वालों मेंं उपमंडल मुख्यालय भी शामिल है। बरसात के दौरान उप मंडल मुख्यालय भवन की नेशनल हाईवे बाइपास की तरफ दीवार के पास भारी मात्रा में पानी जमा हो गया। नगर के कई प्रमुख मार्गों, बाजारों, आवासीय कॉलोनियों और सरकारी कार्यालयों में जलभराव होने से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर के विभिन्न हिस्सों में घंटों तक पानी जमा रहने से लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में अनाज मंडी, सजुमा रोड, रेलवे रोड, कुलवंत नगर, कपिल मुनि रोड व शहर के कई अन्य इलाके शामिल रहे। कपिल मुनि रोड पर नगर पालिका कार्यालय से रेलवे रोड को जोडऩे वाले बाजार में कई-कई फीट तक पानी भर गया। इसके कारण स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बाजार में खरीदारी के लिए आए लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। कई दुकानों और मकानों में बारिश का पानी घुस जाने से व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। राजकीय महिला कॉलेज के समीप स्थित इंदिरा कॉलोनी में भी जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह चरमराई रही। सजुमा रोड स्थित वार्ड-1 में सीवर मैन हालोंं को गलियों के निर्माण व रिपेयर के नाम पर ब्लाक्सों के बीच दबाने से पानी की निकासी नहीं हो सकी। इसके अलावा वार्ड-11 की धीमान स्टूडियो, यादव मिष्ठान व वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सामुदायिक भवन के साथ लगते मुख्य मार्ग सहित शहर के अधिकांश हिस्सों में जलभराव की समस्या बनी रही। शहर के लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति उत्पन्न होती है। स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बाढ़ प्रबंधन के बड़े-बड़े दावे किए थे। बारिश में व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई।
ये हैं मुख्य रूप से पानी निकासाी न होने के मुख्य बड़े कारण:
बाढ़ प्रबंधन के तहत शहर एवं ग्रामीण अंचल मेंं पानी निकासी के मार्गों को सुगम करना था। इसके तहत सफाई का कार्य व्यापक स्तर पर करना जरूरी था। लेकिन वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सामुदायिक भवन के सामने व कुछ दूसरे स्थानों पर अवैध कालोनियों के नाम पर व्यापक स्तर पर गैर कानूनी तौर से मिट्टी खनन कार्य किया गया है। इससे मुख्य निकासी के मार्ग अवरूद्ध हो गए हैं। इसी तरह सिंचाई विभाग के संसाधनों की समुचित रूप से सफाई नहीं हुई है। जंगली वनस्पति से संसाधन घिरे हैं। उधर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांट में कुल 5 मोटरों में से 2 पिछले कई दिनों से खराब पड़ी हैं। ऐसे में सीवरेज प्रणाली प्रभावित है और गंदा पानी आवासीय-व्यवसायिक क्षेत्रों में घुस रहा है।
एसडीएम के आदेशों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे अधिकारी:
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की शिकायतों को देखते हुए एसडीएम अजय हुड्डा समय-समय पर बाढ़ प्रबंधन कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं। निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों की कमियां सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को उन्हें दूर करने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद जल निकासी व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।
ब्लाक्स के नीचे से बाहर निकालेंगे सीवरेज मैनहाल: सचिव
नगर पालिका सचिव पवन शर्मा ने बताया कि बारिश के बाद जलभराव वाले क्षेत्रों में अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें भेजी गई हैं। जहां-जहां पानी की निकासी में बाधा आ रही है वहां तत्काल समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर में जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। जिन गलियों में सीवर मैन हाल ब्लाक्स के नीचे दबा दिए गए है उन्हें क्रियाशील बनाने को ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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