फ सल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों व पुलिस प्रशासन के सहयोग से निकाला फ्लैग मार्च–किसानों से की पराली नहीं जलाने की अपील

सुनहरा आंचल
विजय सिरोही

डीसी डॉ. विवेक भारती के दिशा-निर्देशानुसार फ सल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों व पुलिस प्रशासन के सहयोग से मंगलवार को फ्लैग मार्च निकाला गया। यह फ्लैग मार्च गांव प्यौदा, सिसला, सिसमौर, हरसौला, खेड़ी शेरू, जाखौली, देवबन, सांघन, तितरम, सारण व सेगा गांव से निकला। इस फ्लैग मार्च की अगुवाई कृषि विभाग कैथल के उपमंडल अधिकारी सतीश नारा ने की। एसडीओ सतीश नारा ने लोगों को पराली प्रबंधन के बारे में पूर्ण जानकारी दी। किसानों को धान अवशेष न जलाने बारे और कृषि यंत्रों का उपयोग कर फ सल अवशेषों का प्रबंध करने बारे जागरूक किया।

उन्होंने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. बाबू लाल के मार्ग दर्शन में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जागरूक किया जा रहा है। फ सल अवशेष जलाना सामाजिक बुराई ही नहीं बल्कि कानूनी अपराध भी है और इससे प्रकृति, जमीन तथा मानव जीवन पर अत्यंत गंभीर व प्रतिकूल प्रभाव पड़ते है, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट होने के साथ-साथ प्राकृतिक प्रदूषण की वजह से मनुष्य भी अनेक जानलेवा बीमारियों का शिकार होता है। किसान पराली जलाने से बिल्कुल परहेज करें। उन्होंने यह भी कहा कि अवशेष प्रबंधन कर सभी किसान एक अच्छे नागरिक होने का भी परिचय दें और समाज के प्रति अपनी सकारात्मक जिम्मेदारी निभाएं। फ सल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार द्वारा प्रति एकड़ 1000 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जा रहे हैं। किसी भी सूरत में किसान पराली ना जलाएं बल्कि अवशेष प्रबंधन कर जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाए रखें। उन्होंने बताया कि फ्लैग मार्च का वास्तविक संदेश यही है कि पराली जला कर किसान सिर्फ अपनी जमीन को ही बंजर नहीं बना रहे, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण की वजह से भविष्य में कैंसर, दमा इत्यादि जानलेवा बीमारियों को भी सीधा निमंत्रण दे रहे हैं। इस मौके पर बीईओ जगबीर लांबा भी मौजूद रहे।

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