विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर ईको क्लब द्वारा कलायत के गांव शिमला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कलायत के सरकारी स्कूल में शिक्षकों के साथ पौधारोपण करते विद्यार्थी

सुनहरा आंचल न्यूज/कलायत(तरसेम सिंह)
कलायत विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर ईको क्लब द्वारा कलायत के गांव शिमला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इसके तहत पौधे लगाए गए व पर्यावरण को लेकर जन जागरण अभियान चलाया गया। विद्यालय प्रधानाचार्या रश्मि भारद्वाज ने बताया कि कार्यक्रम प्रभारी प्रवीण कुमार की देख रेख में दसवीं व बारहवीं कक्षाओ के टॉपर विद्यार्थियों ने वृक्षारोपण के जरिये पर्यावरण को हरा भरा रखने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने चित्रकला द्वारा अपने भाव व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने पर्यावरण विषय पर विभिन्न प्रकार के पोस्टर बनाए। भारद्वाज ने कहा कि पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए हम सबकी साझा जिम्मेवारी बनती है। यदि हम अपनी सामान्य आदतों में पांच नियमों को शामिल कर लें तो काफी हद तक पर्यावरण का संरक्षण किया जा सकता है। सबसे पहले अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाएं और उनकी देखभाल करें। पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके वातावरण में ऑक्सीजन बढ़ाने का काम करते हैं। ऐसे में पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने चाहिए। साथ ही पौधा की देखभाल भी करें। सिंगल यूज के प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें। इसकी बजाए कपड़े के बैग, स्टील बोतलें या कांच की बोतलों का प्रयोग करें। ताकि कचरा कम हो और प्रदूषण घटे। पानी की बर्बादी पर अंकुश लगाएं। खुद भी पानी की बर्बादी को रोकें और दूसरों को भी जागरूक करें। पानी की अत्याधिक बर्बादी से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है। कचरे का सही प्रबंधन करें और बिजली की खपत को कम करें। गीले व सूखे कचरे का सही से निष्पादन करें ताकी सूखे कचरे को फिर से रिसाइकिल करके उसे पुन: प्रयोग में लाया जा सके। बिजली की खपत कम करके प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम पड़ता है। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे छोटे कदम उठा कर हम पर्यावरण के संरक्षण में अहम भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। विद्यालय प्रबंधक समिति के वरिष्ठ सदस्य फूल चंद मोर ने कहा कि पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रहा है जिससे अनेक प्रकार की महामारियों की आशंका है। इस का एक मात्र उपाय ऐसी पद्धतियों को अपनाना है जो पर्यावरण के अनुकूल हो। इस अवसर पर विद्यालय स्टाफ, विद्या

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