कलायत क्षेत्र में बरसात के साथ आए तेज तुफान से मची तबाही के घावों को भरने क लिए शासन-प्रशासन से उम्मीद

सुनहरा आंचल न्यूज/कलायत(तरसेम सिंह)
कलायत क्षेत्र में बरसात के साथ आए तेज तुफान से मची तबाही के घावों को भरने क लिए शासन-प्रशासन से उम्मीद की किरण प्रभावितों को है। प्राकृतिक आपदा से हुई इस बड़ी क्षति के बावजूद अभी तक धरातल पर कोई व्यापक प्रशासनिक संज्ञान दिखाई नहीं दे रहा। सरकार की नीति अनुसार अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करनी की थी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। इसके चलते जिनका नुकसान हुआ है वे अधिकारियों के दौरे की इंतजार कर रहे हैं। इस कड़ी में गांव बात्ता में नेशनल हाई-वे पर स्थित रिद्धि-सिद्धि ओवरसीज राइस मिल में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। मिल के गोदामों में वर्षा का पानी अभी तक पूरी तरह नहीं निकल पाया है। जिससे चावल, बारदाना और मशीनरी को नुकसान पहुंचा है। मिल संचालक रवि प्रकाश ने बताया कि तेज आंधी के कारण गोदाम पर लगी लोहे की चादरों की छत उड़ गई। इसके बाद हुई बारिश का पानी सीधे गोदाम में भर गया। तैयार चावल, बारदाना भीगकर खराब हो गया। मशीनरी भी पानी की चपेट में आने से प्रभावित हुई है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार मिल को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। धान का कटोरा माने जाने वाले जिला कैथल की औद्योगिक और कृषि आधारित इकाइयों पर यह प्राकृतिक आपदा ऐसे समय में आई है जब पहले से ही राइस मिल्स आर्थिक मंदी की मार झेल रही हैं। मिल मालिक लंबे समय से सरकारी नीतियों जिसमें धान चावल व्यापार की कठिनाइयों और भुगतान संबंधी समस्याओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद करते आ रहे हैं। दूसरी तरफ ईरान, अमेरिका और अरब देशों में युद्ध जैसे तनावपूर्ण हालात ने चावल निर्यात व आपूर्ति और मांग के समीकरण को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे हालात में तूफान और बारिश ने मिल संचालकों की कमर तोडऩे जैसा काम किया है। कलायत क्षेत्र में केवल रिद्धि सिद्धि राइस मिल ही नहीं अपितु कलायत की एवन कॉटन मिल के साथ साथ कुछ प्रमुख शिक्षण संस्थान, निजी आवासो के सोलर पैनल सिस्टम, वन क्षेत्र और बिजली विभाग को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर छतें उखड़ गईं। सोलर स्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त हो गए और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई। निजी आवासों में लगे सोलर पैनलों और औद्योगिक इकाइयों के ढांचों को भी तूफान ने भारी क्षति पहुंचाई है। सबसे बड़ा सवाल उन निजी संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों की क्षतिपूर्ति से जुड़ा है। जिनकी आय के साधन सीमित हैं और जो पहले से ही बैंकों के कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। शिक्षा भारती स्कूल प्राचार्य जितेंद्र सिंह, एवन कॉटन मिल से जुड़े प्रहलाद राय और रिद्धि सिद्धि राइस मिल संचालक रवि प्रकाश सहित प्रभावित लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का तत्काल सर्वे करवाकर प्रभावित इकाइयों को उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। आपदा की मार झेलने वालों का कहना है कि प्राकृतिक त्रासदी किसी के नियंत्रण में नहीं होती। लेकिन संकट के समय प्रशासनिक संवेदनशीलता और राहत व्यवस्था ही पीड़ितों के लिए सबसे बड़ा सहारा होती है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पहले से मंदी की मार झेल रही औद्योगिक इकाइयों के लिए फिर से खड़ा होना बेहद कठिन हो जाएगा।

फोटो : गोदाम के अंदर आज भी भरा वर्षा का पानी और क्षतिग्रस्त सामान

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