सुनहरा आंचल न्यूज/विजय सिरोही:- आमजन ने एक बार फिर से लम्बे समय से अपनी मांग को उठाया है के जीन्द कुरुक्षैत्र दोपहर के समय फिर चालू किया जाये जोकि करोना काल में बंद हो गयी थी और जीन्द कुरुक्षैत्र की गाड़ी का समय किया जाये फिक्स या तो जीन्द कुरुक्षैत्र रेलवे लाईन डबल की जाये या फिर गाड़ियों का समय सारणी दरुस्त किया जाये ताकि जो लोग दैनिक, मासिक व सालाना पास ले कर डयूटी पर जाने के इस गाड़ी में सफर करतें रहे भारतीय रेलवे जोकि समान्य आदमी के लिए भारत में किसी भी स्थान पर आवागमन के सस्ता विकल्प के रुप में जानी जाती है। जिस पर पूरे भारत में हजारों लोग सफर करतें है। रेलगाड़ी में लगभग निम्न आय से मध्यम आय वाले लोग ही सफर करतें है। जिस में दैनिक पास, मासिक पास, त्रि-मासिक, छः महीने व एक वर्षिय पास के लोग सफर करते है जिससे रेलवे भी अच्छा आय प्राप्त करता है जनरल गाड़ी के यात्रियों ने जानकारी देते हुये बताया कि रेलवे प्रशासन आय दिन लोकल पैसंजर गाड़ी के मुसाफिरों की अनदेखी कर रहा है। वैसे तो रेलवे प्रशासन अनदेखी करने के लिए पहले से मशहूर है पर ये अनदेखी गाड़ी की नही उसमें सफर कर रहे लोगो की है यात्रीयों के अनुसार 54038 गाड़ी में सभी दर्जे के लोग सफर करते है पर इस गाड़ी में अक्सर देखा गया है कि गाड़ी या तो निरधारित समय से पहले या कई-कई घंटे देरी से चलती है जीन्द से चलकर कुरुक्षैत्र को आने जाने वाली यही एक गाड़ी है जिस में सामान्य लोग मासिक से सालाना पास पर यात्रा करते है परन्तु रेलवे प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नही दे रहा और अपनी आंखे मूंदे बैठा रहता है क्योकि उन्हे किसी के समय की कोई चिन्ता नही है वह जनरल गाड़ी को अपने मुताबिक चलाते है देरी हो जाने के कारण विश्व विधालय के बच्चे पैप्पर देने से चूक जाते है उनका साल भी खराब हो जाता है।

गर्मी का समय है गाड़ी के समय पर ना चलने से सभी यात्रियों के काम पर असर पड़ता है कई यात्री समय से अपने काम पर नही पहूंच पाते तो उनकी मजदूरी भी कट जाती है और कई लोगो की तो नौकरी भर चली जाती है पर रेलवे प्रशासन को इस बात से कोई फर्क नही पडता उनके कानों पर जूँ तक नही रेंगती यात्रियों को सुचना का अधिकार तो है पर उन्हे सूचनाए भी नही दी जाती गाड़ी के देरी से चलने का कारण क्या है जिस कारण बहूत से यात्री जो हर दिन सफर करते थे उनकी संख्या कम हो रही है और इस तरह से खाली गाड़ी चलाने से सरकार का ही खर्चा बढ़ रहा है सरकार भी इस और कोई ध्यान नही देती क्योकि सरकार को आम आदमी सिर्फ वोटिंग के समय ही दिखाई देता है यहां बात हो रही 54038 नम्बर गाड़ी की जो जीन्द से कुरुक्षैत्र और कुरुक्षैत्र से जीन्द चलती है जो आय दिन अपने निर्धारित समय से देरी से ही चलती जोकि एक आम बात है गाड़ी के यात्रियों को भी इस बात की आदत सी पड़ गई है जिस कारण पढ़े लिखे लोग भी कोई शिकायत नही करते क्योकि उन्हे पता है शिकायत करने से कुछ नही होगा। गल्ती करने वाले पर कोई कार्यवाही नही होगी इस बारे में जब स्टेशन मास्टर से बात की गई तो उन्होने बताया की गाड़ी के बारे मे हमें पूरी जानकारी नही होती तो हम जनता को क्या देंगे रेलवे कर्मचारी सतीश कुमार ने बताया के पहले इस गाड़ी का कैथल पहुंचने का समय प्रातः 6ः58 मिन्ट का था पर अब उसका कैथल पहुँचने का समय प्रातः 7ः30 का है
उन्होने कहा टिक्ट खिड़की के पास आपको जानकारी मिल जायेगी परन्तु वहां पर देखने के बाद सूचना पट पर गाड़ी का समय 6ः58 ही लिखा था तो इस बात का क्या मतलब हुआ के रेलवे कर्मचारी भी अपने काम को लेकर अपडेट नही है। सूचनाओं को दरुस्त करवाने की बजाय मिडीया पर ही दोष मड़ दिया के आप लोगो में नेगिटविटी फैला रहे है। यही हाल अकेले कैथल का ही नही अपितु जीन्द से कैथल पूरे ट्रेक का है वीरवार को गाड़ी कुरुक्षेत्र 10ः30 बजे पहुंची अपने वास्तिवक समय से लगभग 2-3 घंटे लेट और ना ही इस गाड़ी में रेलवे पुलिस की कोई डयूटी होती है बस स्टेशन पर बैठे लोगो को परेशान करना ही उनका मकसद है। यही उनकी डयूटी है। बेशक गाड़ी में यात्रियो का या किसी का झगड़ा भी हो जाये रेलवे सुरक्षा के नाम पर रेलवे पुलिस का कार्य भी असरहानीय है दूसरी और या़ित्रयों के रात्रि ठहराव की व्यवस्था भी नही है 24 घंटे गाड़ियो का आवागमन रहता जिसमें कई गाडिया तो लम्बे सफर से आती है कैथल रेलवे स्टेशन पर या़़त्री ठहराव के कमरे का भी बुरा हाल है जहा पर लोग जमीन पर ही सोते है कैथल में रैन बसेरा रेलवे स्टेशन 3 किलोमीटर के दूरी पर पड़ता है जिसकी कोई भी जानकरी रेलवे स्टाफ केे पास नही होती क्योकि रेलवे के पास जानकारी कक्ष ही नही है। अगर रात के समय ऑटो में सफर करना खतरे से खाली नही है और वहां ऑटो किराये के नाम पर लूट है रात को 11ः00 बजे के बाद ऑटो का किराया पर सवारी लगभग 50 रु0 पड़ता है और स्पेशल में तो वो पूरी जेब काटते है रात्रि को गमन करने वाले यात्रियों के अनुसार सरकार व रेलवे प्रशासन के द्वारा स्टेशन पर ही रात्रि ठराव की व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए। रेलवे टिक्ट खिड़की पर जिस की डयूटी वो भी सवारियों से बदतमीजी से बात करते है और हर दिन हर टिक्ट पर 5 रु0 बचाते है वो पैसे कहा जाता है ये सोचने का विषय है। अगर सरकार और कैथल प्रशासन इस बात की खुफिया जांच करे और त्वरित एक्शन में आये तो बहुत कुछ सामने आ सकता है और इन व्यवस्थाओं को दरुस्त किया जा सकता है
